विधानसभा चुनाव परिणाम: पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में NDA की जीत पर दी बधाई

पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रदर्शन पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए विजयी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अटूट विश्वास

​पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संदेश में कहा कि इन राज्यों के चुनाव परिणाम बताते हैं कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व पर एक बार फिर अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है। उन्होंने इसे विकास की जीत बताते हुए कहा:

​यह जनादेश पश्चिम बंगाल, असम एवं पुडुचेरी में विकास, सुशासन और जनकल्याण के कार्यों को नई गति प्रदान करेगा।

सुशासन और विकास का एजेंडा

​नीतीश कुमार, जो स्वयं बिहार में सुशासन के मॉडल के लिए जाने जाते हैं, इस बात पर जोर दिया कि जनता अब केवल खोखले वादों के बजाय धरातल पर होने वाले विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन क्षेत्रों में एनडीए की सरकारें आने वाले समय में जनहित और बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए मजबूती से काम करेंगी।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

​पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह संदेश एनडीए के भीतर एकजुटता को और मजबूत करेगा और विकास के साझा एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

महा-विश्लेषण: बंगाल में दीदी का सूर्यास्त, क्या ममता का अहंकार ही बना उनका काल?

कोलकाता: बंगाल की राजनीति का वह टाइटन जहाज डूब चुका है जिसे ममता बनर्जी ने 29 साल पहले बड़ी उम्मीदों से समंदर में उतारा था। भवानीपुर की हार सिर्फ एक सीट की हार नहीं है, यह उस ब्रैंड ममता का अंत है जिसने कभी वामपंथ के 34 साल के किले को ढहाया था। आज बंगाल में कमल खिल चुका है और ममता बनर्जी अपने ही बुने हुए चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह फँसकर रह गई हैं।

अपनों से गद्दारी या खुद से धोखा ?

​ममता बनर्जी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में INDIA गठबंधन को जो ज़ख्म दिए, उसका गैंगरीन अब उनकी अपनी सरकार को खा गया।

  • नितीश का अपमान: गठबंधन के सूत्रधार नीतीश कुमार को ठुकराकर उन्होंने जो आग लगाई थी, उसी की तपिश में आज टीएमसी झुलस रही है।
  • वोट कटवा नीति: खुद को किंगमेकर समझने के फेर में दीदी ने अकेले चुनाव लड़ा, जिसका सीधा फायदा भाजपा को हुआ। इसे राजनीति में सॉइसाइडल मूव (आत्मघाती कदम) कहा जा रहा है।

आरएसएस का सॉफ्ट कॉर्नर और हार्ड रियलिटी

​ममता ने हमेशा एक दोहरी राजनीति खेली। एक तरफ मंच से मोदी-शाह को ललकारा, तो दूसरी तरफ Rss को सच्चा देशभक्त बताकर अपनी ओर से खिड़की खुली रखी।

  • नतीजा: न तो वह अल्पसंख्यकों का पूर्ण भरोसा जीत पाईं (सांसदों की सीएए वोटिंग में गैर-हाजिरी की वजह से), और न ही संघ ने उन्हें बख्शा। अंततः संघ की ठोस रणनीति ने उन्हें उनके ही गढ़ में चारों खाने चित कर दिया।

मुकुल रॉय सिंड्रोम: बीजेपी = टीएमसी

​मुकुल रॉय ने जो कहा था, वह आज सच साबित हो रहा है। टीएमसी के आधे नेता पहले ही भाजपा की विचारधारा में रंग चुके थे। जैसे ही भवानीपुर से ममता की हार की खबर आई, टीएमसी के भीतर भगदड़ का माहौल है। अब टीएमसी के नेताओं का हश्र राघव चड्ढा जैसा होना तय है— यानी एक-एक कर जाँच एजेंसियों का शिकंजा और राजनीतिक निर्वासन।

अजगर ने निगली ममता की विरासत

​जिस तरह भाजपा ने धीरे-धीरे BJD (ओडिशा), BSP (यूपी), और JDU (बिहार) जैसी क्षेत्रीय शक्तियों को बौना कर दिया, आज उसी लिस्ट में TMC का नाम सबसे ऊपर जुड़ गया है। ममता बनर्जी ने जिस भाजपा को 1997 में उंगली पकड़कर बंगाल में चलना सिखाया था, आज उसी ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

ममता बनर्जी ने सियासी बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहाँ से होय वाली कहावत को सच कर दिखाया है। वामपंथ को खत्म करने के लिए उन्होंने जिस दक्षिणपंथ को खाद-पानी दिया, आज उसी ने उनकी जड़ें उखाड़ फेंकी हैं। बंगाल अब दीदी के आंसुओं पर नहीं, बल्कि भाजपा के परिवर्तन के नारों पर झूम रहा है।

क्या आपको लगता है कि ममता बनर्जी की यह हार भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों के अंत की शुरुआत है?

भवानीपुर में बड़ा उलटफेर: सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को दी मात, बंगाल की राजनीति में नया मोड़

​भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल, कोलकाता में भारी सुरक्षा बल तैनात।

​सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में दर्ज की ऐतिहासिक जीत।

​ममता बनर्जी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने में रहीं नाकाम।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। राज्य की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली भवानीपुर में भाजपा के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक कड़े मुकाबले में हरा दिया है।

कांटे की टक्कर और रोमांचक जीत

​सुबह से ही भवानीपुर सीट पर हलचल तेज थी। मतगणना के शुरुआती राउंड्स में ममता बनर्जी ने बढ़त बनाई हुई थी। एक समय ऐसा भी आया जब वह 17,000 वोटों से आगे चल रही थीं, लेकिन 16वें राउंड के बाद बाजी पलट गई।

  • अंतिम परिणाम: सुवेंदु अधिकारी ने लगभग 15,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
  • प्रमुख मोड़: शहरी इलाकों की तुलना में भवानीपुर के मिश्रित आबादी वाले बूथों पर सुवेंदु अधिकारी को भारी जनसमर्थन मिला।

दूसरी बार दी मात

​यह इतिहास में दूसरी बार है जब सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को सीधे चुनाव में परास्त किया है। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था। इस जीत ने न केवल सुवेंदु अधिकारी का कद बढ़ाया है, बल्कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन की लहर को भी मजबूती दी है।

​यह भवानीपुर की जनता की जीत है और अहंकार की हार है। बंगाल के लोगों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब बदलाव चाहते हैं।

सुवेंदु अधिकारी (जीत के बाद पहली प्रतिक्रिया)

टीएमसी के लिए बड़ा झटका

​अपने ही गढ़ और पारंपरिक सीट भवानीपुर पर ममता बनर्जी की हार तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए एक गहरा मनोवैज्ञानिक झटका मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस हार का असर राज्य की अन्य सीटों के मनोबल और आने वाली सरकार के स्वरूप पर भी पड़ेगा।

बड़ी खबर: सुपौल के मरौना प्रखंड में होगा सड़कों और पुलों का जाल, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दी हरी झंडी

सुपौल/पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सुपौल जिले के मरौना प्रखंड की जनता को एक बड़ी सौगात दी है। उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर उनके आप्त सचिव वीरेंद्र कुमार ने ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) को मरौना प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में 11 महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए पत्र जारी कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

इन प्रमुख योजनाओं को मिली मंजूरी:

​जारी किए गए आधिकारिक पत्र (पत्रांक 172, दिनांक 27/04/2026) के अनुसार, जनहित में निम्नलिखित कार्यों को अति आवश्यक बताया गया है:

  1. तिलयुगा बलान नदी पर पुल: मरौना-निर्मली पथ के योदराही वार्ड नंबर-02 से उत्तर तिलयुगा बलान नदी पर एच.एल. ब्रिज (HL Bridge) और पहुंच पथ का निर्माण।
  2. भलुआही सुरक्षा बांध से कुसगौल: भलुआही सुरक्षा बांध से कुसगौल होते हुए कबरी बांध तक सड़क और पुल का निर्माण।
  3. 8 किलोमीटर लंबी सड़क: मरौना उत्तर के कारारही वार्ड नंबर 10 से मुख्य सड़क राम विलास सिंह के घर से होते हुए कमरैल सीमा तक सड़क निर्माण।
  4. लालपुर से सोहनपुर मार्ग: निर्मली-मरौना मुख्य मार्ग पर लालपुर से सोहनपुर को जोड़ने वाली सड़क में तिलयुगा नदी पर पुल का निर्माण।
  5. महादलित टोलों का जुड़ाव: परसौनी वार्ड नंबर 0-10 महादलित टोला से पंचायत सरकार भवन होते हुए मंगासिहौल वार्ड नंबर 12 तक सड़क निर्माण।
  6. गंनौरा और मधुबनी सीमा: गंनौरा कोरयानी टोला वाया मधुबनी सीमा सड़क में बलान नदी पर पुल का निर्माण।
  7. गंनौरा से महोलिया टोला: गंनौरा वार्ड 04 मुख्य सड़क से महादलित बस्ती और IOCL गैस गोदाम होते हुए महोलिया टोला तक पक्की सड़क।

विकास की ओर बढ़ते कदम

​इस पत्र के माध्यम से उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी सुधारना सरकार की प्राथमिकता है। इन पुलों और सड़कों के बन जाने से मरौना प्रखंड के हजारों ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा होगी, खासकर बरसात के समय में तिलयुगा और बलान नदी के कारण होने वाली परेशानियां खत्म होंगी।

​ग्रामीण कार्य विभाग के नोडल ऑफिसर ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है और संबंधित कार्यपालक अभियंता को आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया गया है।

पटना विश्वविद्यालय में प्रतिभा का कत्ल! गोल्ड मेडलिस्ट टॉपर को ही कर दिया PhD से बाहर, आखिर किसके इशारे पर हुआ यह खेल?

शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले पटना विश्वविद्यालय (Patna University) से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शैक्षणिक शुचिता और प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला पटना लॉ कॉलेज के एलएलएम (LLM) टॉपर पवन कुमार यादव से जुड़ा है, जिन्हें विश्वविद्यालय ने खुद गोल्ड मेडल से नवाजा, लेकिन जब पीएचडी (PhD) नामांकन की बारी आई, तो उन्हें सिस्टम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

कौन हैं पवन कुमार यादव?

रोहतास जिले के रहने वाले पवन कुमार यादव एक मेधावी छात्र हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और उसके बाद पटना लॉ कॉलेज के सत्र 2022-24 में 80.19% अंकों के साथ पूरे विभाग में टॉप किया। दीक्षांत समारोह की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि तत्कालीन राज्यपाल डॉ. आरिफ मोहम्मद खान और कुलपति प्रो. अजय कुमार सिंह ने उन्हें स्वर्ण पदक (Gold Medal) और उपाधि देकर सम्मानित किया था।

क्या है दांधली का पूरा आरोप?

हैरानी की बात यह है कि जो छात्र अपने विभाग का गोल्ड मेडलिस्ट है और नेट (NET) क्वालीफाइड भी है, उसे ही पीएचडी नामांकन लिस्ट से बाहर कर दिया गया। आरोप है कि एलएलएम विभाग और पटना विश्वविद्यालय ने नामांकन प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती है। शिकायत के मुताबिक, पवन की ही कैटेगरी में उनसे काफी कम प्रतिशत अंक वाले छात्रों का नामांकन ले लिया गया, लेकिन टॉपर को दरकिनार कर दिया गया।

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह महज एक तकनीकी खामी है या फिर इसके पीछे जातीय दुर्भावना और प्रतिभा का गला घोंटने की कोई गहरी साजिश है? आखिर एक स्वर्ण पदक विजेता छात्र को अपने हक के लिए दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है?

गोल्ड मेडलिस्ट छात्र के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल छात्र का मनोबल तोड़ता है, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय की साख पर धब्बा लगाता है। भूमि न्यूज़ लाइव इस मामले की तह तक जाएगा और जब तक पवन को न्याय नहीं मिलता, हम इस खबर को प्रमुखता से उठाते रहेंगे।

बने रहिए भूमि न्यूज़ लाइव के साथ, सच्चाई हम दिखाएंगे।

महंगाई का महा-विस्फोट! क्यों पेट्रोल-डीजल के दाम ₹28 तक बढ़ाने की हो रही है चर्चा? जानें इस खबर का असली आधार

​देश के मध्यम वर्ग और वाहन मालिकों के लिए एक डराने वाली खबर सामने आ रही है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और आर्थिक विशेषज्ञों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹25 से ₹28 प्रति लीटर तक की ऐतिहासिक वृद्धि हो सकती है।

​लेकिन यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर अचानक इतनी बड़ी वृद्धि की नौबत क्यों आई? हमारी टीम ने जब इसकी पड़ताल की, तो मुख्य रूप से 3 बड़े कारण सामने आए:

1. वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन में बाधा

​खबरों के अनुसार, मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते युद्ध के हालात और लाल सागर (Red Sea) के रास्ते होने वाले व्यापार में रुकावट आने की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। अगर तेल के जहाजों का रास्ता बदलता है या सप्लाई रुकती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।

2. तेल कंपनियों का बढ़ता घाटा (Under-recoveries)

​भारत की सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले देश में कीमतें स्थिर रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद दाम न बढ़ाने से कंपनियों को जो घाटा हुआ है, उसकी भरपाई के लिए अब कीमतों में बड़ा सुधार (Price Revision) करने का दबाव है।

3. डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति

​कच्चा तेल डॉलर में खरीदा जाता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होता है और रुपया कमजोर, तो भारत को तेल आयात करने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इसी ‘इनपुट कॉस्ट’ के बढ़ने को इस संभावित बढ़ोतरी का आधार बताया जा रहा है।

क्या वाकई अगले हफ्ते बढ़ेंगे दाम?

​रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के बीच अगले सप्ताह एक उच्च स्तरीय बैठक हो सकती है। इस बैठक में तय होगा कि क्या कीमतों को एक साथ बढ़ाया जाए या किस्तों में, ताकि जनता में ज्यादा आक्रोश न फैले।

आम जनता पर प्रभाव (Impact Assessment)

ईएमआई का बोझ: महंगाई बढ़ने से आरबीआई (RBI) ब्याज दरें बढ़ा सकता है, जिससे आपकी होम लोन या कार लोन की EMI भी महंगी हो सकती है।

परिवहन: ट्रक और लॉजिस्टिक की लागत 20-25% बढ़ सकती है।

थाली पर असर: डीजल महंगा होने से खेती की लागत और ढुलाई महंगी होगी, जिससे सीधे तौर पर राशन और सब्जियां महंगी हो जाएंगी।

बिहार: रोहतास के स्कूल में मीट कांड! क्या बच्चों का धर्म भ्रष्ट करने की रची जा रही है गहरी साजिश?

रोहतास (बिहार): भारत में इन दिनों ऐसी घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है जो न केवल मन को विचलित करती हैं, बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति पर भी सीधा प्रहार करती हैं। ताज़ा मामला बिहार के रोहतास जिले के रामडीह से सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील (MDM) के दौरान बच्चों को कथित तौर पर मांस परोसे जाने की खबर ने सनसनी फैला दी है।

आखिर रामडीह के स्कूल में क्या हुआ?

​जानकारी के अनुसार, रोहतास के एक सरकारी स्कूल के MDM में गाय मांस देने की दावा किया गया। जैसे ही यह खबर अभिभावकों तक पहुँची, स्कूल में हंगामा खड़ा हो गया। सवाल यह उठता है कि जिस जगह को ‘शिक्षा का मंदिर’ कहा जाता है, वहाँ इस तरह की ‘नापाक’ हरकत कैसे मुमकिन है? क्या यह महज प्रशासन की लापरवाही है या इसके पीछे कोई गहरा धार्मिक षडयंत्र?

एक के बाद एक: धर्म पर प्रहार की कड़ियां

​यह कोई इकलौती घटना नहीं है। आज देश के कोने-कोने से ऐसी खबरें आ रही हैं जो इशारा करती हैं कि हिंदू समाज की आस्था को निशाना बनाया जा रहा है:

  • दोस्ती के नाम पर धोखा: कहीं दोस्ती का झांसा देकर गौ-मांस खिलाया जा रहा है, तो कहीं भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
  • पढ़े-लिखे लोगों का ब्रेनवाश: हैरानी की बात तो यह है कि अब आईटी कंपनियों (IT Companies) में काम करने वाले उच्च-शिक्षित लोग भी इस कट्टरपंथ की चपेट में हैं। वहां भी धर्म परिवर्तन (Conversion) के रैकेट सक्रिय होने की खबरें चिंता का विषय हैं।
  • शिक्षण संस्थानों को निशाना: बच्चों के कोमल मन पर बचपन से ही इस तरह की चीजें थोपकर क्या उनके संस्कारों को मिटाने की कोशिश की जा रही है?

​क्या भारत को कट्टरपंथ की आग में झोंकने की तैयारी है?

​भारत अपनी सहिष्णुता के लिए जाना जाता है, लेकिन इसे कमजोरी समझने की भूल की जा रही है। एक सोची-समझी रणनीति के तहत बहुसंख्यक समाज की मान्यताओं को आहत किया जा रहा है। चाहे वह खान-पान के माध्यम से हो या लव-जिहाद और धर्मांतरण के जरिए, मकसद सिर्फ एक ही नजर आता है—भारत की सनातन संस्कृति को भीतर से खोखला करना।

सवाल यह है कि आखिर यह सिलसिला कब थमेगा? क्या प्रशासन और सरकारें इन कट्टरपंथियों पर नकेल कसने में नाकाम साबित हो रही हैं?

​रोहतास की यह घटना एक अलार्म (Warning) है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल यह हमारे घरों के भीतर तक पहुँच जाएगा। प्रशासन को चाहिए कि वह रामडीह मामले की निष्पक्ष जांच करे और जो भी इस ‘धर्म भ्रष्ट’ करने के खेल में शामिल है, उसे ऐसी सजा दी जाए कि दोबारा कोई ऐसी हिमाकत न कर सके।

आपकी क्या राय है?

क्या आपको भी लगता है कि यह एक सोची-समझी साजिश है? क्या प्रशासन इन कट्टरपंथियों को रोकने में सक्षम है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें और इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए खुशखबरी: फुलपरास (मधुबनी) में आयोजित होगा अनुमंडल स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह 2026

फुलपरास, मधुबनी: शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के प्रोत्साहन के लिए बिहार के मधुबनी जिले के फुलपरास में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। विमल देव कृष्ण समग्र विकास संस्थान के तत्वावधान में इस वर्ष भी ‘अनुमंडल स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह 2026’ आयोजित किया जाएगा।

​यह समारोह प्रतिभावान छात्र-छात्राओं की मेहनत को सम्मानित करने और उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित करने का एक सुनहरा अवसर है।

कार्यक्रम का विवरण

​संस्थान द्वारा यह आयोजन इंटरनेशनल वर्कर्स डे (श्रमिक दिवस) के अवसर पर किया जा रहा है:

  • दिनांक: 1 मई 2026 (शुक्रवार)
  • समय: दोपहर 02:00 बजे से
  • स्थान: फुलपरास, मधुबनी (बिहार) – 847409

सम्मान के लिए पात्रता

​इस सम्मान समारोह में भाग लेने के लिए निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करने वाले छात्र-छात्राएं पात्र होंगे:

  1. ​विद्यार्थी ने इस वर्ष मैट्रिक (10th) या इंटर (12th) की परीक्षा उत्तीर्ण की हो।
  2. ​बिहार बोर्ड (BSEB) या सीबीएसई (CBSE) में कम से कम 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हों।

Registration Process

​कार्यक्रम में शामिल होने और सम्मान प्राप्त करने के लिए छात्र-छात्राओं को पूर्व-पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 28 अप्रैल 2026 (शाम 5:00 बजे तक) निर्धारित की गई है।

रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज:

  • ​आधार कार्ड की फोटोकॉपी (व्हाट्सएप्प पर)
  • ​एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी
  • ​मोबाइल नंबर

कैसे करें आवेदन?

इच्छुक छात्र-छात्राएं संस्थान के सचिव रुपेश कुमार के व्हाट्सएप नंबर 9431481103 पर अपने दस्तावेज भेजकर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करा सकते हैं।

आयोजक का संदेश

​संस्थान के सचिव रुपेश कुमार ने बताया कि “विमल देव कृष्ण समग्र विकास संस्थान” सदैव मेधावी छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और अनुमंडल स्तर के छात्रों में छिपी प्रतिभा को समाज के सामने लाना है।

नोट: समय सीमा का ध्यान रखें और 28 अप्रैल तक अपना रजिस्ट्रेशन जरूर पूरा कर लें।

मधुबनी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: नेपाल जेल से फरार शातिर अपराधी गिरफ्तार, अवैध हथियार के साथ 2 अन्य भी दबोचे गए

मधुबनी (हरलाखी): भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद मधुबनी पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। हरलाखी थाना पुलिस ने नेपाल की जेल से फरार एक शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है। साथ ही, एक अन्य मामले में ग्रामीणों के सहयोग से पुलिस ने अवैध देसी पिस्टल के साथ दो अपराधियों को भी गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है।

Harlakhi Police Arrest Criminals

घटनाक्रम 01: नेपाल जेल से फरार अपराधी अजय साफी गिरफ्तार

​हरलाखी थानाध्यक्ष को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने ग्राम उमगाँव दुर्गापट्टी के पास से अजय साफी (पिता: इंदल साफी, निवासी: गोपालपुर) को विधिवत गिरफ्तार किया।

पृष्ठभूमि:

  • ​अजय साफी पूर्व में नेपाल के एक बैंक में डकैती की घटना में शामिल था।
  • ​नेपाल पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जलेश्वर जेल में डाला था, लेकिन जेल में हुए आंतरिक विद्रोह का फायदा उठाकर वह फरार हो गया था।
  • ​इससे पहले पुलिस ने उसके सहयोगी अनरजीत राम को देसी कट्टा, गांजा और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था, जिसने पूछताछ में अजय साफी के नाम का खुलासा किया था।
Police Arrest Criminals

घटनाक्रम 02: हथियार के साथ घुसे अपराधियों को ग्रामीणों ने पकड़ा

​दूसरी घटना सोठगाँव टोला की है, जहाँ ग्रामीणों की सतर्कता से बड़ी वारदात टल गई। पुलिस को सूचना मिली कि दो अपराधी रामू सदाय के घर में हथियार के साथ घुस गए हैं। ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए दोनों को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

गिरफ्तार अभियुक्त:

  1. अमर सदाय (पिता: रामपूत सदाय, निवासी: सोठगाँव)
  2. विक्की सदाय (पिता: स्व. मिथिलेश सदाय, निवासी: सोठगाँव)

बरामदगी:

  • ​01 अवैध देसी पिस्टल
  • ​01 मोटरसाइकिल

​पूछताछ के दौरान विक्की सदाय ने स्वीकार किया कि उसने यह हथियार नेपाल से 10,000 रुपये में खरीदा था और इसे अपने दोस्त शिवा (निवासी: महोत्तरी, नेपाल) के लिए ले जा रहा था।

पुलिस की कार्रवाई

​मधुबनी पुलिस ने इन मामलों में सुसंगत धाराओं के तहत कांड संख्या 0-74/26 और 0-15/26 दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय मधुबनी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि पुलिस अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।

शोक संवेदना: पत्रकारिता के स्तंभ सुमित चौधरी की शक्ति का अवसान, शोक में डूबा झंझारपुर

Journalist Sumit Chaudhary Mother Tribute

झंझारपुर/मधुबनी: झंझारपुर की मिट्टी के तेजतर्रार पत्रकार और ‘भूमि न्यूज़ लाइव’ को अपनी मेहनत से सींचने वाले सुमित चौधरी की माता जी के आकस्मिक निधन से आज मानवता और पत्रकारिता जगत मर्माहत है। यह केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि उस प्रेरणापुंज का अंत है जिसने समाज को एक निर्भीक पत्रकार दिया।

संघर्षों की जननी और सफलता का आधार

सुमित चौधरी ने शून्य से शिखर तक का जो सफर तय किया, उसमें उनकी माता जी का योगदान किसी हिमालय से कम नहीं था। भूमि न्यूज़ लाइव को झंझारपुर में स्थापित करने और उसे जनता की आवाज़ बनाने के पीछे सुमित के जुनून के साथ-साथ उनकी माँ की दुआओं का पहरा था। उन्होंने न केवल अपने बेटे को संस्कार दिए, बल्कि विषम परिस्थितियों में भी ‘सत्य’ के मार्ग पर अडिग रहने का साहस प्रदान किया।

सुमित चौधरी जी की माता जी का जाना पत्रकारिता जगत के लिए एक व्यक्तिगत क्षति है। सुमित जी ने जिस ईमानदारी से ‘भूमि न्यूज़’ को आगे बढ़ाया, उसमें उनकी माता जी के संस्कारों की स्पष्ट झलक दिखती है। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें।- कार्तिक कुमार, पत्रकार, भूमि न्यूज लाइव

भूमि न्यूज़ लाइव की पूरी टीम और समस्त पत्रकार साथी इस वज्रपात की घड़ी में सुमित चौधरी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

विनम्र श्रद्धांजलि! ॐ शांति!