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बिहार प्रदेश जद(यू) सांगठनिक निर्वाचन 2026: नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों की सूची जारी

Nitish kumar

पटना: जनता दल (यूनाइटेड) में सांगठनिक मजबूती और भविष्य की रणनीतियों को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार प्रदेश जद(यू) सांगठनिक निर्वाचन-2026 के अंतर्गत, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की स्वीकृति के बाद राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार ने शेष सांगठनिक जिलाध्यक्षों की आधिकारिक सूची जारी कर दी है।

​इस सूची में पार्टी के समर्पित और अनुभवी कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। यह नियुक्तियाँ पार्टी के निचले स्तर (Grassroot level) को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई हैं।

नवनियुक्त जिलाध्यक्षों की सूची (प्रमुख जिले)

​कार्यालय आदेश संख्या 52/26 के अनुसार, निम्नलिखित प्रमुख नामों की घोषणा की गई है:

क्र०सं०जिला / नगर का नामनिर्वाचित अध्यक्ष का नाम
1मुजफ्फरपुरश्री अनुपम सिंह
2पटना नगरश्री राधेश्याम कुशवाहा
3गया (बेगूसराय)श्री नन्द लाल राय
4नालंदामो० मसरूर अहमद जुबैरी उर्फ मो० अरशद
5आरा नगरश्री जय प्रकाश चौधरी
6सीवानश्री विकास कुमार सिंह उर्फ जीसू सिंह

(पूरी सूची के लिए नीचे दिए गए आधिकारिक पत्र को देखें)

संगठन को मिलेगी नई धार

​राज्य निर्वाचन पदाधिकारी अशोक कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस सूची में कुल 25 सांगठनिक क्षेत्रों के नामों की घोषणा की गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नई नियुक्तियों से आगामी चुनावों और पार्टी के विस्तार कार्यों में नई ऊर्जा का संचार होगा।

​पार्टी नेतृत्व ने सभी नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों को उनके इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई और सफल कार्यकाल की शुभकामनाएँ दी हैं।

“संगठन की मजबूती ही हमारी असली ताकत है। नए पदाधिकारियों के चयन से पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है।”

क्या आप अपने जिले के नवनियुक्त अध्यक्ष के बारे में और जानकारी चाहते हैं? हमें कमेंट में बताएं!

डिजिटल इंडिया में 16 वर्षों से बंद पड़ा है यह स्कूल, ग्रामीणों ने शुरू किया आमरण अनशन

खुटौना (मधुबनी): शिक्षा के अधिकार की बातें कागजों पर भले ही सुनहरी लगें, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयां करती है। खुटौना प्रखंड के चतुर्भुज पिपराही पंचायत स्थित खिलही के नोनिया टोल में पिछले 16 वर्षों से बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय को फिर से शुरू करवाने के लिए ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है। प्रशासन की बेरुखी से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

प्रमुख के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू

​विद्यालय के अस्तित्व को बचाने और बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए खुटौना के पूर्व प्रमुख सह वर्तमान पंचायत समिति सदस्य संजीव भिंडवार के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया गया है। यह आंदोलन उसी बंद पड़े विद्यालय के परिसर में शुरू किया गया है, जो कभी बच्चों की खिलखिलाहट से गूंजता था।

क्यों फूटा ग्रामीणों का आक्रोश?

​आंदोलनकारियों का कहना है कि विद्यालय बंद होने के कारण सबसे ज्यादा मार गरीब परिवारों और छोटे बच्चों पर पड़ रही है।

प्रशासनिक अनदेखी: ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बार-बार सूचित करने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

दूरी की समस्या: बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय कर दूसरे गांवों में जाना पड़ता है।

सुरक्षा का डर: छोटे बच्चों को दूर भेजने में अभिभावक हमेशा आशंकित रहते हैं।

​जब तक विद्यालय को पुनः चालू करने के लिए विभाग की ओर से कोई ठोस लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हमारा अनशन जारी रहेगा। यह बच्चों के भविष्य का सवाल है।

संजीव भिंडवार, आंदोलनकारी नेतृत्वकर्ता

अनशन पर बैठे 12 सत्याग्रही

​इस आंदोलन में संजीव भिंडवार के साथ कुल 12 लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ​रामेश्वर महतो, रामकृष्ण महतो, विष्णु देव महतो, यशोधर महतो।
  • ​रविंद्र महतो, शोभित महतो, सूर्य नारायण महतो, जुगत लाल महतो।
  • ​रामस्वरूप महतो, राम प्रकाश महतो और बलराम महतो।

क्षेत्र में चर्चा का विषय

​जैसे-जैसे अनशन का समय बढ़ रहा है, आस-पास के गांवों के लोगों का समर्थन भी बढ़ता जा रहा है। भारी संख्या में ग्रामीण अनशन स्थल पर पहुंचकर एकजुटता दिखा रहे हैं। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया शिक्षा विभाग इस जन आक्रोश के बाद जागता है या नोनिया टोल के बच्चों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।

एडमिट कार्ड बना मजाक! कैंडिडेट की फोटो की जगह छपी कुत्ते की तस्वीर, सोशल मीडिया पर वायरल

बिहार की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली अक्सर अपनी अजीबोगरीब गलतियों की वजह से सुर्खियों में रहती है। ताजा मामला एक बार फिर सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है, जहाँ एक छात्र के एडमिट कार्ड (Admit Card) पर उसकी तस्वीर की जगह एक कुत्ते की फोटो छाप दी गई।

यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग विभाग की लापरवाही का जमकर मजाक उड़ा रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह घटना बिहार के एक प्रतिष्ठित संस्थान की परीक्षा से जुड़ी बताई जा रही है। एक अभ्यर्थी ने जब अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो वह दंग रह गया। कार्ड पर छात्र के नाम, पिता का नाम और अन्य विवरण तो सही थे, लेकिन ‘प्रोफाइल फोटो’ वाले कॉलम में छात्र की जगह एक कुत्ते का चेहरा नजर आ रहा था।

हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर चूक पर किसी भी स्तर (डाटा एंट्री से लेकर वेरिफिकेशन तक) पर ध्यान नहीं दिया गया और एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर उड़ रहा मजाक

जैसे ही इस एडमिट कार्ड का स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर आया, यूजर्स ने बिहार के परीक्षा बोर्ड और संबंधित विभाग को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया।

  • मीम्स की बाढ़: लोग कमेंट्स में लिख रहे हैं कि “बिहार में कुछ भी मुमकिन है।”
  • सिस्टम पर सवाल: शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह की गलतियां न केवल छात्र का मनोबल गिराती हैं, बल्कि परीक्षा की गंभीरता को भी खत्म करती हैं।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे कारनामे

बिहार में एडमिट कार्ड पर किसी सेलेब्रिटी या जानवर की फोटो छपना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बार एडमिट कार्ड्स पर:

  1. बॉलीवुड अभिनेत्रियों (सनी लियोन, प्रियंका चोपड़ा) की तस्वीरें।
  2. भगवान गणेश की फोटो।
  3. यहाँ तक कि राजनेताओं की फोटो भी देखी जा चुकी हैं।

विभाग की सफाई

मामला तूल पकड़ने के बाद संबंधित विभाग ने इसे तकनीकी खराबी या डाटा एंट्री ऑपरेटर की लापरवाही करार दिया है। हालांकि, छात्र के लिए यह किसी मानसिक परेशानी से कम नहीं है, क्योंकि एडमिट कार्ड में सुधार के लिए उसे अब दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहाँ हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात कर रहे हैं, वहां इस तरह की मानवीय और तकनीकी गलतियां सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

क्या आपको लगता है कि इस तरह की गलतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

महरैल में सजेगा प्रभु श्री राम का दरबार: 27 मार्च को निकलेगी जिला स्तरीय महाविशाल रामनवमी शोभायात्रा

झंझारपुर (मधुबनी): मिथिला की पावन धरती पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में मझौरा दुर्गा स्थान में मुरारी मण्डल की अध्यक्षता में ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि रामनवमी शोभायात्रा समिति, महरैल के तत्वावधान में इस वर्ष जिला स्तरीय ‘महाविशाल रामनवमी शोभायात्रा’ और भव्य ‘संध्या मैथिली कार्यक्रम’ का आयोजन किया जाएगा।

शोभायात्रा का पूरा विवरण

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता को भी प्रदर्शित करेगा।

  • दिनांक: 27 मार्च 2026 (शुक्रवार)
  • समय: दोपहर 1:00 बजे से
  • प्रस्थान स्थल: महरैल रेलवे स्टेशन चौक स्थित हनुमान मंदिर

इन मार्गों से गुजरेगी भव्य यात्रा

आयोजकों के अनुसार, रामभक्ति से ओत-प्रोत यह शोभायात्रा हनुमान मंदिर प्रांगण से शुरू होकर क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख मार्गों का भ्रमण करेगी। यात्रा के मुख्य पड़ाव इस प्रकार होंगे:

  • महरैल
  • कर्णपुर
  • हरना
  • हरड़ी
  • झंझारपुर-अंधराठाढ़ी के प्रमुख मार्ग

विशेष आकर्षण: झांकियां और मैथिली कार्यक्रम

शोभायात्रा को भव्य बनाने के लिए विशेष धार्मिक झांकियों की तैयारी की जा रही है। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों की गूंज के साथ श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए प्रभु श्री राम के आदर्शों का संदेश देंगे। यात्रा के समापन के पश्चात संध्या मैथिली कार्यक्रम का आयोजन होगा, जो क्षेत्रीय कला और संस्कृति को समर्पित रहेगा।

“रामनवमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है। इस यात्रा का उद्देश्य समाज में आपसी सौहार्द, भाईचारा और सनातन संस्कृति के मूल्यों को सुदृढ़ करना है।” – आयोजन समिति

बैठक में उपस्थित गणमान्य

बैठक के दौरान आयोजन को सफल बनाने के लिए रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें मुख्य रूप से मिहीर ठाकुर, अजय झा, अभिषेक चौधरी, मुरारी मण्डल, अनित, अजीत, सचिन, आमोद झा, दुर्गा नन्द, रोहन, भरत, मुकेश, दीपक, टुनटुन, हेमंत, भविष्य, अक्षय, आशीष, सूरज और बंटी सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

श्रद्धालुओं से अपील

समिति ने समस्त धर्म प्रेमियों और ग्रामवासियों से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस महाविशाल यात्रा में शामिल होकर पुण्य के भागी बनें। साथ ही, श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान शांति, अनुशासन और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की गई है।

जन सुराज ने मधुबनी जिला संगठन की घोषणा की: अनिल मिश्रा बने जिला अध्यक्ष, शमसुल हक़ को मिली महामंत्री की जिम्मेदारी

मधुबनी, 11 मार्च 2026 – बिहार में बदलाव की राजनीति का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही जन सुराज पार्टी ने अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूती देते हुए मधुबनी जिला संगठन के पदाधिकारियों की सूची जारी कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस नई टीम का ऐलान किया।

सांगठनिक मजबूती के लिए नई रणनीति

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने बताया कि जन सुराज के मूलभूत सिद्धांतों को जमीन पर उतारने के लिए पूरे राज्य को 44 सांगठनिक जिलों में बांटा गया है। इसी रणनीति के तहत मधुबनी जिले के लिए वरिष्ठ साथियों के साथ विचार-विमर्श कर एक सशक्त कमेटी का गठन किया गया है।

“यह जिला कमेटी क्षेत्रीय और राज्य नेतृत्व के बीच एक सेतु का काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जिले के सभी प्रखंडों और पंचायतों में संगठन का पुनर्गठन करना और पार्टी की गतिविधियों को गति देना है।” – मनोज भारती, प्रदेश अध्यक्ष

मधुबनी जिला संगठन के मुख्य पदाधिकारी

घोषणा के अनुसार, मधुबनी जिले की कमान निम्नलिखित अनुभवी हाथों में सौंपी गई है:

  • जिला अध्यक्ष: श्री अनिल मिश्रा
  • जिला महामंत्री: श्री शमसुल हक़

यह टीम जिले के वरिष्ठ सदस्यों के साथ मिलकर पंचायत स्तर तक संगठन के विस्तार का कार्य करेगी।

कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख नेतृत्व

संगठन की घोषणा के इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रदेश स्तर के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं:

  • सुभाष सिंह कुशवाहा (प्रदेश संगठन महामंत्री)
  • सरवर अली (प्रदेश महासचिव)
  • धरमवीर प्रसाद सिंह (कोषाध्यक्ष)
  • श्रीमती सरिता देवी (महिला अध्यक्ष)
  • दीपक कुमार भंडारी (युवा अध्यक्ष)

जन सुराज का विजन

जन सुराज पार्टी का उद्देश्य बिहार के हर जिले में एक ऐसी टीम तैयार करना है जो सीधे जनता से जुड़ी हो। मधुबनी जिला कमेटी की यह घोषणा इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सलाहकार समिति और अन्य पदाधिकारियों की विस्तृत सूची पार्टी के आधिकारिक पोर्टल पर भी उपलब्ध कराई गई है।

मधुबनी: फुलपरास में मवेशी चोर गिरोह सक्रिय, ब्रह्मानंद यादव ने प्रशासन से की सख्त कार्रवाई की माँग

मधुबनी (बिहार): फुलपरास नगर पंचायत में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे सरेआम मवेशियों की चोरी करने से भी नहीं हिचक रहे हैं। ताजा मामला परमेश्वर चौक का है, जहाँ मंगलवार तड़के तीन-चार अज्ञात चोरों ने एक सांड को जबरन पिकअप वैन में लादकर चोरी करने का प्रयास किया।

घटना का विवरण

स्वतंत्र पत्रकार और पूर्व अध्यक्ष ब्रह्मानंद यादव द्वारा थाना अध्यक्ष को लिखे गए पत्र के अनुसार, यह घटना 10 मार्च 2026 की सुबह करीब 3 से 4 बजे के बीच की है। बताया जा रहा है कि चोरों ने सांड के गले में रस्सी बाँधकर उसे घसीटते हुए पिकअप वैन पर लादने की कोशिश की।

इसी बीच सांड गाड़ी से कूदकर भागने लगा। चोरों ने गाड़ी से उसका पीछा भी किया, लेकिन तभी वहाँ मौजूद एक सब्जी विक्रेता, मोहम्मद सोवराती, जाग गए। उनकी सजगता और शोर मचाने के कारण चोर घबरा गए और सांड को छोड़कर पिकअप वैन लेकर मौके से फरार हो गए।

सीसीटीवी फुटेज से हो सकती है पहचान

ब्रह्मानंद यादव ने अपने पत्र में प्रशासन का ध्यान इस ओर खींचा है कि फुलपरास नगर पंचायत के विभिन्न गाँवों से लगातार सांड और पाड़ा (भैंस का बच्चा) चोरी होने की खबरें आ रही हैं। उन्होंने पुलिस से माँग की है कि:

  • परमेश्वर चौक, हटिया चौक और लोहिया चौक पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जाँच की जाए।
  • संदिग्ध पिकअप वैन का नंबर निकालकर अपराधियों की पहचान की जाए।
  • क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

प्रशासन से न्यायोचित कार्रवाई की अपील

इस मामले की प्रतिलिपि कार्यपालक पदाधिकारी (नगर पंचायत फुलपरास) और अनुमंडल पदाधिकारी को भी भेजी गई है। स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है और उन्होंने पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द दोषियों को गिरफ्तार करने की माँग की है।

ऐतिहासिक फैसला: भारत में पहली बार पैसिव यूथेनेशिया को मिली मंजूरी, जानें क्या है वह कानून जिसने दी मौत की इजाजत

भारत के न्यायिक इतिहास में 11 मार्च 2026 की तारीख सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल से कोमा (Persistent Vegetative State) में पड़े 32 वर्षीय हरीश राणा के मामले में वह फैसला सुनाया, जिसकी चर्चा दशकों से हो रही थी। कोर्ट ने हरीश की ‘जीवन रक्षक प्रणाली’ (Life Support) हटाने की अनुमति दे दी है।

यह पहला मौका है जब 2018 के ऐतिहासिक फैसले के बाद किसी ठोस मामले में कोर्ट ने इस प्रक्रिया को हरी झंडी दिखाई है।

किस कानून और अनुच्छेद के तहत हुआ यह फैसला?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन) ने यह आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) की व्यापक व्याख्या के आधार पर दिया है।

  • अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार): कोर्ट के अनुसार, ‘जीवन के अधिकार’ में केवल जीवित रहना ही नहीं, बल्कि ‘गरिमा के साथ मरने का अधिकार’ (Right to Die with Dignity) भी शामिल है।
  • कॉमन कॉज बनाम भारत संघ (2018): इसी ऐतिहासिक फैसले में 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने पैसिव यूथेनेशिया को कानूनी मान्यता दी थी। 2023 में कोर्ट ने इसके नियमों को और सरल बनाया, जिसके तहत अब हरीश राणा को राहत मिली है।

इतिहास में पहली बार क्यों? (अरुणा शानबाग से हरीश राणा तक का सफर)

लोग अक्सर अरुणा शानबाग (2011) के मामले को याद करते हैं, लेकिन वह हरीश राणा के केस से अलग था:

  1. अरुणा शानबाग केस (2011): सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया को सैद्धांतिक मंजूरी तो दी थी, लेकिन अरुणा के मामले में उसे लागू करने से मना कर दिया था क्योंकि अस्पताल का स्टाफ उनकी देखभाल करना चाहता था।
  2. हरीश राणा केस (2026): यह पहला व्यावहारिक कार्यान्वयन (Practical Application) है जहाँ कोर्ट ने सभी मेडिकल रिपोर्ट और माता-पिता की सहमति के बाद खुद ‘जीवन रक्षक प्रणाली’ (जैसे कि Clinically Assisted Nutrition) हटाने का आदेश AIIMS को दिया है।

फैसले की मुख्य बातें और कानूनी प्रक्रिया

कोर्ट ने इस फैसले तक पहुँचने के लिए एक बेहद सख्त और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया:

  • मेडिकल बोर्ड का गठन: कोर्ट ने AIIMS दिल्ली के विशेषज्ञों का एक ‘प्राइमरी’ और ‘सेकेंडरी’ मेडिकल बोर्ड बनाया। बोर्ड ने पुष्टि की कि हरीश के मस्तिष्क में सुधार की गुंजाइश 0% है।
  • मानवीय संवेदना: जस्टिस पारदीवाला ने शेक्सपियर के प्रसिद्ध वाक्य “To be or not to be” का जिक्र करते हुए कहा कि जब सुधार की कोई उम्मीद न हो, तो जीवन को मशीनों के जरिए खींचना मरीज के प्रति क्रूरता है।
  • अभिभावकों की भूमिका: कोर्ट ने हरीश के माता-पिता के 13 साल के संघर्ष की सराहना की और माना कि उनका अपने बेटे को गरिमापूर्ण विदाई देने का निर्णय ‘निस्वार्थ प्रेम’ का प्रतीक है।

पैसिव vs एक्टिव यूथेनेशिया: क्या है अंतर?

यह समझना जरूरी है कि भारत में केवल ‘पैसिव’ (Passive) यूथेनेशिया ही वैध है:

प्रकारविवरणकानूनी स्थिति
एक्टिव यूथेनेशियामरीज को जहर या इंजेक्शन देकर मारना।अवैध (इसे हत्या माना जाता है)
पैसिव यूथेनेशियाइलाज या जीवन रक्षक मशीनें हटा लेना ताकि प्राकृतिक मृत्यु हो सके।वैध (कठोर नियमों के साथ)

कानून का मानवीय चेहरा

हरीश राणा का मामला यह साबित करता है कि कानून केवल किताबों में लिखी धाराओं का नाम नहीं है, बल्कि यह समय आने पर संवेदना और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए भी खड़ा होता है। यह फैसला भविष्य में उन हजारों परिवारों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा जो अपनों को ‘वेजिटेटिव स्टेट’ की अंतहीन पीड़ा में देख रहे हैं।

वर्ल्ड चैंपियन कप्तान सूर्या के खिलाफ झा जी का जहरीला वार: क्या 242 रन बनाने के बाद भी सूर्या को भैंस चराने जाना चाहिए?

नई दिल्ली/अहमदाबाद: टीम इंडिया ने 2026 टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया है। सूर्यकुमार यादव अब महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा के उस एलीट क्लब में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने भारत को अपनी कप्तानी में विश्व विजेता बनाया। लेकिन, इस ऐतिहासिक जीत के जश्न के बीच सोशल मीडिया पर एक अलग ही ‘जंग’ छिड़ गई है।

​हाल ही में सोशल मीडिया पर ‘झा जी’ जैसे कुछ आलोचकों ने सूर्यकुमार यादव की कप्तानी और उनकी पृष्ठभूमि को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है। एक वायरल पोस्ट में उन्हें “भैंस चराने भेजने” तक की बात कही गई है। सवाल यह है कि क्या यह आलोचना खेल पर आधारित है या इसके पीछे कोई गहरी सामाजिक कुंठा छिपी है?

​आँकड़ों की जुबानी: सूर्या का ‘विराट’ प्रदर्शन

​अगर हम पिछले विश्व कप विजेताओं के प्रदर्शन से तुलना करें, तो सूर्या के आँकड़े उनकी काबिलियत पर मुहर लगाते हैं:

  • एमएस धोनी (2007): 154 रन (भारत बना चैंपियन)
  • रोहित शर्मा (2024): 257 रन (भारत बना चैंपियन)
  • सूर्यकुमार यादव (2026): 242 रन (भारत बना चैंपियन)

​9 पारियों में 242 रन बनाने वाले कप्तान पर जब उंगलियां उठती हैं, तो यह साफ हो जाता है कि समस्या उनके ‘बल्ले’ से नहीं, बल्कि उनकी ‘पहचान’ से है।

​प्रदर्शन बनाम मानसिकता: क्यों निशाने पर हैं सूर्या?

​क्रिकेट जानकारों का मानना है कि जब तथाकथित रसूखदार पृष्ठभूमि के खिलाड़ी फ्लॉप होते हैं, तो अक्सर “खराब फॉर्म” कहकर उन्हें छोड़ दिया जाता है। लेकिन जैसे ही अन्य तबके से आने वाला कोई खिलाड़ी सफलता के शिखर पर पहुँचता है, तो उसकी छोटी सी चूक को भी मुद्दा बना दिया जाता है।

विशेषज्ञ की राय: “सूर्या ने अपनी कप्तानी में न सिर्फ वर्ल्ड कप जीता, बल्कि टीम में एक ऐसा माहौल बनाया जहाँ हर खिलाड़ी सुरक्षित महसूस करता है। उनके खिलाफ इस तरह की भाषा खेल की समीक्षा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत द्वेष है।”

​”झा जी” के बयान पर भड़का फैंस का गुस्सा

​सोशल मीडिया पर सूर्यकुमार यादव के समर्थन में भी लहर चल पड़ी है। फैंस का कहना है कि सूर्या ने अपनी मेहनत से दुनिया के नंबर-1 टी-20 बल्लेबाज का खिताब हासिल किया है। किसी की जाति या पृष्ठभूमि को लेकर उसे अपमानित करना न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह खेल की भावना के भी खिलाफ है।

​चमक बरकरार रहेगी

​सूर्यकुमार यादव के लिए यह सिर्फ एक शुरुआत है। वर्ल्ड कप की ट्रॉफी हाथ में लेकर उन्होंने उन तमाम आलोचकों के मुँह पर ताला जड़ दिया है जो उन्हें कमतर आंक रहे थे। सूर्या की चमक उन लोगों की आँखों में चुभ सकती है जिनकी सोच संकीर्ण है, लेकिन करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के लिए वह एक असली ‘सुपरस्टार’ हैं।

बिहार के स्वर्णिम काल के रूप में याद किया जाएगा नीतीश कुमार का कार्यकाल: ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव

सुपौल, बिहार: बिहार सरकार के कद्दावर नेता कोशी के विश्वकर्मा और ऊर्जा मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की जमकर सराहना की है। सुपौल जिले के निर्मली में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा 2026’ के दौरान एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य में हुए बुनियादी ढांचागत बदलावों को ऐतिहासिक बताया।

आजाद बिहार का स्वर्णिम युग

​मंत्री बिजेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2005 से 2025 तक का कालखंड बिहार के इतिहास में “स्वर्ण अक्षरों” में लिखा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की तस्वीर बदलने का जो संकल्प लिया था, वह आज धरातल पर दिख रहा है।

14 घंटे का सफर अब सिर्फ 40 मिनट में

​विकास का उदाहरण देते हुए उन्होंने पुराने दिनों की याद ताजा की। उन्होंने बताया:

  • अतीत की चुनौती: एक समय था जब सुपौल से निर्मली पहुंचने में लोगों को 14 घंटे का समय लग जाता था। यातायात की स्थिति अत्यंत दयनीय थी।
  • आज की उपलब्धि: नीतीश कुमार सरकार के रोड कनेक्टिविटी और पुल निर्माण कार्यों की बदौलत आज यही दूरी मात्र 40 मिनट में तय की जा रही है।

विपक्ष पर तीखा तंज

​गठबंधन की राजनीति और विपक्ष के हमलों पर बोलते हुए बिजेंद्र यादव ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने एनडीए (NDA) के साथ जाने का निर्णय लिया, तो विपक्ष के कई बड़े नेताओं के फोन आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार हमारे सर्वमान्य नेता हैं और उनके निर्णय के साथ पूरी पार्टी और राज्य की जनता मजबूती से खड़ी है।

​”हमारे नेता जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। कोसी क्षेत्र में रेल पुल से लेकर सड़कों के जाल तक, आज जो कायापलट हुआ है, वह नीतीश कुमार की दूरदर्शिता का परिणाम है।” — बिजेंद्र प्रसाद यादव

​समृद्धि यात्रा के माध्यम से सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच ले जा रही है। बिजेंद्र यादव का यह बयान न केवल कोसी क्षेत्र के विकास को रेखांकित करता है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए भी एक मजबूत संदेश देता है।

ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने वाले का बेटा बना IAS: रायबरेली के विमल कुमार ने रचा इतिहास, स्वागत में निकला 7 KM लंबा जुलूस

IAS Vimal Kumar Raebareli Success Celebration

रायबरेली, उत्तर प्रदेश: कहते हैं कि अगर इरादों में जान हो, तो गरीबी की बेड़ियाँ भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के एक छोटे से गाँव चांदेमऊ के रहने वाले विमल कुमार ने इस बात को सच कर दिखाया है। विमल ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 107वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है।

संघर्ष की नींव पर खड़ी हुई सफलता

​विमल की यह सफलता इसलिए खास है क्योंकि उनका सफर अभावों और चुनौतियों से भरा रहा। उनके पिता, रामदेव, एक ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते हैं और परिवार के गुजारे के लिए दूसरों के खेतों में बंटाई पर खेती भी करते हैं।

​आर्थिक तंगी के बावजूद, रामदेव ने कभी अपनी मजबूरी को बच्चों की पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने मेहनत की, पसीना बहाया, ताकि उनका बेटा कलम की ताकत से अपनी तकदीर बदल सके।

​”मजदूरी करके बच्चों को पढ़ाया… आज बेटे ने हमारी सारी मेहनत सफल कर दी।”

रामदेव (विमल के पिता)

गाँव में मना दीवाली जैसा जश्न

​विमल के IAS बनने की खबर जैसे ही गाँव पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गाँव वालों ने ऐसा स्वागत किया जो अक्सर बड़े राजनेताओं के नसीब में भी नहीं होता:

  • 7 किलोमीटर लंबा जुलूस: विमल के स्वागत में करीब 7 किमी लंबा विजय जुलूस निकाला गया।
  • गाड़ियों का काफिला: जुलूस में 12 कारें, 50 से ज्यादा बाइकें और गूंजते हुए डीजे शामिल थे।
  • जगह-जगह स्वागत: रास्ते भर लोगों ने विमल को रोककर फूल-मालाओं से लाद दिया और मिठाई खिलाकर बधाई दी।

मेहनत और सपनों का मेल

​विमल कुमार की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। यह साबित करता है कि:

  1. कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है।
  2. माता-पिता का त्याग संतान की सबसे बड़ी शक्ति होता है।
  3. मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है।

​विमल कुमार अब प्रशासन का हिस्सा बनकर देश की सेवा करेंगे, लेकिन उनकी कहानी हमेशा रायबरेली की गलियों में गूंजती रहेगी। यह कहानी हमें सिखाती है कि हालात चाहे कितने भी विपरीत क्यों न हों, यदि आपमें लड़ने का जज्बा है, तो आप दुनिया जीत सकते हैं।

क्या आप भी विमल के इस संघर्ष को सलाम करते हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में बताएं और इस प्रेरणादायक कहानी को शेयर करें!