
बिहार के वाणिज्य कर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्व संग्रह के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विभागीय मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने गुरुवार को पटना स्थित ‘कर भवन’ में पत्रकारों को संबोधित करते हुए इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी साझा की।
मुख्य आकर्षण: एक नजर में
विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में न केवल अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़े हैं, बल्कि राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के शीर्ष राज्यों में अपनी जगह बनाई है।
- कुल राजस्व संग्रह: ₹43,324.79 करोड़
- पिछले वर्ष के मुकाबले वृद्धि: 4.09%
- जीएसटी संग्रह में वृद्धि: 9.20% (राष्ट्रीय औसत 6% से अधिक)
- जीएसटी वृद्धि में स्थान: देश में चौथा
राजस्व संग्रह का विस्तृत विवरण
सचिव संजय कुमार सिंह ने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए बताया कि कुल संग्रह में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वस्तु एवं सेवा कर (GST) की रही है।
जीएसटी (GST) संग्रह की स्थिति
विभाग ने अकेले जीएसटी मद में ₹32,801 करोड़ जुटाए, जो पिछले साल की तुलना में 11.7% अधिक था। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा आईजीएसटी (IGST) बैलेंस समायोजन के कारण ₹724 करोड़ की कटौती की गई, जिसके बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹32,077.22 करोड़ रहा।
| मद | विवरण |
|---|---|
| कुल संग्रह (2025-26) | ₹43,324.79 करोड़ |
| कुल संग्रह (2024-25) | ₹41,623.96 करोड़ |
| नकद संग्रह वृद्धि (SGST, CGST, IGST) | 10.60% |
राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का प्रदर्शन
मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने गर्व के साथ बताया कि उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी स्लैब में कटौती के बावजूद बिहार ने शानदार प्रदर्शन किया है:
राष्ट्रीय औसत को पछाड़ा: जहां देश की औसत जीएसटी वृद्धि 6% रही, वहीं बिहार ने इसे काफी पीछे छोड़ दिया है।
जीएसटी वृद्धि दर: बिहार 9.20% की वृद्धि के साथ देश में चौथे स्थान पर है।
नकद संग्रह: सभी नकद संग्रहों (SGST, CGST, IGST और उपकर) के मामले में बिहार, कर्नाटक के बाद देश में दूसरे स्थान पर रहा है।
यह विभाग की कार्यकुशलता और राज्य में बेहतर आर्थिक गतिविधियों का परिणाम है। अभी ये आंकड़े अनंतिम (Provisional) हैं, क्योंकि ‘पेशा कर’ (Professional Tax) के आंकड़े जुड़ने के बाद संग्रह में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।— बिजेंद्र प्रसाद यादव, मंत्री, वाणिज्य कर विभाग
बिहार सरकार के लिए यह आंकड़े उत्साहजनक हैं। विभाग का मानना है कि पारदर्शी कर प्रणाली और बेहतर निगरानी के कारण राजस्व में यह उछाल देखने को मिला है। आने वाले दिनों में पेशा कर के अंतिम आंकड़े आने के बाद यह रिकॉर्ड और भी बेहतर हो सकता है।




















