
बिहार के मधुबनी जिले में ग्रामीण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेज-3 के तहत जिले में पहली बार अत्याधुनिक FDR (Full Depth Restoration) तकनीक का उपयोग कर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।
यह तकनीक न केवल सड़कों को अधिक टिकाऊ बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आइए जानते हैं क्या है यह तकनीक और मधुबनी के ग्रामीणों को इससे क्या लाभ मिलने वाला है।

टी-28 बेलहा से खुटौना तक सड़क का
मधुबनी जिले के खुटौना प्रखंड में टी-28 बेलहा से ललमनियां होते हुए प्रखंड मुख्यालय तक जाने वाली 15.350 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस परियोजना की खास बातें निम्नलिखित हैं:
- कुल लंबाई: 15.350 किमी।
- प्रगति: लगभग 6.450 किमी हिस्से में पीसीसी और पुल-पुलिया का कार्य पूर्ण।
- शेष कार्य: 8.900 किमी में डामरीकरण (Blacktopping) का कार्य अत्याधुनिक मशीनों से जारी।
- ट्रायल प्रोजेक्ट: यह दरभंगा-कोसी प्रमंडल का पहला ट्रायल प्रोजेक्ट है, जिसे भविष्य के लिए मॉडल माना जा रहा है।

क्या है FDR (Full Depth Restoration) तकनीक?
साधारण भाषा में कहें तो FDR पुरानी सड़क को उखाड़कर फेंकने के बजाय उसे ‘रिसाइकिल’ करने की एक प्रक्रिया है।
- पुरानी सामग्री का उपयोग: इसमें विशेष मशीनों द्वारा पुरानी सड़क की परतों को पीस दिया जाता है।
- स्टेबलाइजेशन: पिसी हुई सामग्री में सीमेंट, चूना या अन्य स्टेबलाइजर मिलाए जाते हैं।
- मजबूत आधार: इस मिश्रण को वापस बिछाकर भारी रोलरों से दबाया जाता है, जिससे एक बेहद मजबूत ‘बेस लेयर’ तैयार होती है।
- अंतिम परत: इसके ऊपर डामर या कंक्रीट की अंतिम परत डाली जाती है।

FDR तकनीक के फायदे (Benefits of FDR Technology)
- अत्यधिक टिकाऊ: यह तकनीक सड़क की नींव को इतना मजबूत बना देती है कि भारी वाहनों का दबाव सहना आसान हो जाता है।
- लागत में कमी: पुरानी निर्माण सामग्री का पुन: उपयोग होने के कारण नई सामग्री (गिट्टी, मिट्टी) की जरूरत कम पड़ती है, जिससे लागत घटती है।
- पर्यावरण के अनुकूल: नई खदानों से पत्थर निकालने की जरूरत कम होती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।
- समय की बचत: पारंपरिक तरीकों की तुलना में इस तकनीक से सड़क निर्माण काफी तेजी से पूरा होता है।

स्थानीय विकास को मिलेगी नई रफ्तार
खुटौना और आसपास के ग्रामीणों के लिए यह सड़क किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में सुधार होगा। निर्माण एजेंसी NKSP Infra Pvt. Ltd. के निर्देशक फिरोज यादव के अनुसार, इस तकनीक से बनी सड़कें लंबे समय तक चलेंगी और इन्हें बार-बार मरम्मत की आवश्यकता नहीं होगी।

मधुबनी में FDR तकनीक का यह सफल प्रयोग बिहार के अन्य जिलों के लिए एक मिसाल पेश करेगा। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में राज्य की सभी ग्रामीण सड़कों को इसी आधुनिक और किफायती तकनीक से बनाया जा सकता है।














