
मधुबनी: जिले की राजनीति में इन दिनों विकास कार्यों और सरकारी धन के उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिला परिषद सदस्य ललिता देवी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए ‘डाक बंगला’ की जगह ‘नूतन सभा भवन’ (नया मीटिंग हॉल) के निर्माण को जनता के पैसों की बर्बादी बताया है।
ललिता देवी ने इस संबंध में उप विकास आयुक्त (DDC) सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर इस निर्माण पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?
जिला परिषद सदस्य का कहना है कि मधुबनी जिला परिषद परिसर में पहले से मौजूद डाक बंगला को तोड़कर वहां एक नया सभा भवन बनाने की योजना बनाई गई है। उनका आरोप है कि यह निर्माण अनावश्यक है और यह आम जनता के टैक्स से आए पैसों का दुरुपयोग करने की एक ‘साजिश’ है।
विरोध के मुख्य कारण
पत्र में ललिता देवी ने इस निर्माण को गलत ठहराने के लिए कई महत्वपूर्ण तर्क दिए हैं:
- पहले से उपलब्ध हैं सभा भवन: जिला परिषद परिसर में ‘विकास भवन’ और ‘जिला परिषद भवन’ दोनों में पहले से ही सुसज्जित सभा भवन मौजूद हैं।
- अधूरे प्रोजेक्ट्स की अनदेखी: परिसर में ही एक पांच मंजिला मल्टीपर्पस भवन पिछले 8 वर्षों से अधूरा पड़ा है। उस पर ध्यान देने के बजाय नए प्रोजेक्ट पर पैसा खर्च किया जा रहा है।
- नए भवनों की मंजूरी: परिसर में पहले से ही एक D.P.R.C. भवन के निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है। ऐसे में एक और सभा भवन की कोई आवश्यकता नहीं है।
‘शीत भंडारण गृह’ (Cold Storage) बनाने का सुझाव
ललिता देवी ने प्रशासन को एक वैकल्पिक और जनहितकारी सुझाव भी दिया है। उन्होंने मांग की है कि सभा भवन पर पैसे बर्बाद करने के बजाय:
लदनियां प्रखण्ड के बौरहा गाँव में स्थित जिला परिषद की भूमि पर एक शीत भंडारण गृह (Cold Storage) का निर्माण कराया जाए। इससे क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ होगा और उनकी फसलें बर्बाद होने से बचेंगी।
जिला परिषद सदस्य ने प्रशासन से अपील की है कि व्यापक लोकहित को देखते हुए अनावश्यक सभा भवन के निर्माण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और जनता के पैसे को वहां खर्च किया जाए जहां उसकी असल जरूरत है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पत्र पर क्या संज्ञान लेता है और क्या इस निर्माण कार्य को रोककर जनहित के अन्य कार्यों को प्राथमिकता दी जाती है।

















