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मधुबनी: झंझारपुर में ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, आवास सहायक को बनाया बंधक; अवैध उगाही का संगीन आरोप

​​झंझारपुर (मधुबनी): बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर प्रखंड अंतर्गत संतनगर पंचायत में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पंचायत आवास सहायक और एक अन्य कर्मी को घंटों बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के नाम पर पंचायत में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का खेल चल रहा है।

​क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, आवास सहायक प्रमोद कुमार महतो एक पूर्व कर्मी राजकुमार चौधरी के साथ संतनगर पंचायत के इमादपट्टी गांव में जांच के लिए पहुंचे थे। ग्रामीणों का दावा है कि जांच के नाम पर लाभुकों को डराया जा रहा था कि सर्वेक्षण सूची से करीब 800 लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। सूची में नाम बरकरार रखने के एवज में प्रति लाभुक 700 रुपये की मांग की जा रही थी।

25 से 30 लाख की वसूली का आरोप

ग्रामीणों ने तंत्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह भ्रष्टाचार की पहली किस्त नहीं है। उनके अनुसार:

  • ​​सूची निर्माण: शुरुआत में 1,000 रुपये लिए गए।
  • सर्वेक्षण: पंचायत सचिव राम नारायण राम द्वारा 500 रुपये की कथित वसूली।
  • वर्तमान मांग: आवास सहायक द्वारा फिर से 700 रुपये की मांग।

ग्रामीणों का कहना है कि अब तक पूरे पंचायत से आवास योजना के नाम पर 25 से 30 लाख रुपये की अवैध उगाही की जा चुकी है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

​​स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि ने पुलिस को सूचना दी। भैरवस्थान थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत कराया और लिखित आवेदन लेने के बाद बंधक बनाए गए कर्मियों को अपनी सुरक्षा में लेकर थाना पहुंचाया।

​दो पक्षों में बंटा मामला: आरोप बनाम अपहरण

इस घटना के बाद प्रशासन और कर्मियों का रुख ग्रामीणों के आरोपों से बिल्कुल अलग है:

पक्षमुख्य तर्क / बयान
ग्रामीणजांच के नाम पर अवैध वसूली हो रही है, इसलिए बीडीओ को मौके पर बुलाने की मांग की गई।
BDO (प्रखंड विकास पदाधिकारी)वसूली के आरोप निराधार हैं। असामाजिक तत्वों ने सरकारी कर्मी को अगवा कर बंधक बनाया और मारपीट की।
आवास सहायक (पीड़ित)मुझे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर अगवा किया गया और जान से मारने की कोशिश की गई।

आवास सहायकों ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी

इस घटना के विरोध में प्रखंड के अन्य आवास सहायकों ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होने पर कार्य बहिष्कार का अल्टीमेटम दिया है। पीड़ित आवास सहायक प्रमोद कुमार महतो ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है।

नोट: फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। एक तरफ जहां भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होनी है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मी के साथ हुई मारपीट पर कानूनी शिकंजा कसना तय है।

प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: सही तरीके से चुनाव लड़ना कठिन, पर बिहार की सूरत बदलने के लिए हम 10 साल संघर्ष को तैयार

झंझारपुर, 21 फ़रवरी 2026: जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) अपनी ‘बिहार नवनिर्माण यात्रा’ के क्रम में आज झंझारपुर पहुंचे। यहाँ मीडिया से बात करते हुए उन्होंने संगठन की भविष्य की रणनीति और हालिया चुनावी अनुभवों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।

संगठन का पुनर्गठन: पंचायत स्तर तक पहुँचेगी जन सुराज

प्रशांत किशोर ने बताया कि जन सुराज इस समय अपने संगठन को पुनर्गठित करने के मिशन पर है। यह केवल ऊपरी ढांचे में बदलाव नहीं है, बल्कि उन पुराने साथियों को फिर से एकजुट करने की मुहिम है जो विचारधारा की नींव से जुड़े रहे हैं।

  • उद्देश्य: प्रत्येक प्रखंड और पंचायत स्तर तक पार्टी के सिद्धांतों को पहुँचाना।
  • रणनीति: पदाधिकारियों के चयन के साथ-साथ जमीनी कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना।

चुनाव परिणामों पर PK की खरी-खरी

हालिया चुनाव परिणामों के सवाल पर प्रशांत किशोर ने एक गंभीर और ईमानदार विश्लेषण पेश किया। उन्होंने स्वीकार किया कि बिहार में बिना जाति, धर्म या गठबंधन के सहारे चुनाव लड़ना एक चुनौतीपूर्ण मार्ग है।

सही तरीके से चुनाव लड़कर जीत हासिल करना हमेशा से कठिन रहा है। हमने न तो किसी से गठबंधन किया और न ही जाति-धर्म के समीकरण साधे। यह एक लंबी लड़ाई है, और हम इसके लिए 5 से 10 साल तक संघर्ष करने को तैयार हैं।- प्रशांत किशोर

केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन लक्ष्य

PK ने झंझारपुर की जनता और कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि जन सुराज का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना या हारना नहीं है। उनकी लड़ाई बिहार के हर जिले में:

  • रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए है।
  • ​राज्य में उद्योगों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए है।
  • ​बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज केवल उन लोगों का समूह नहीं है जो वर्तमान सरकार से असंतुष्ट हैं, बल्कि यह उन लोगों का मंच है जो बिहार में वास्तविक बदलाव देखना चाहते हैं।

स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही। सभी ने संगठन की आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की और संकल्प लिया कि वे गाँव-गाँव जाकर ‘जन सुराज’ की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाएंगे।

प्रशांत किशोर के इस दौरे ने साफ कर दिया है कि चुनावी हार-जीत से बेफिक्र होकर वे एक लंबी पारी की तैयारी कर रहे हैं। बिहार की राजनीति में यह ‘शुद्धतावादी’ प्रयोग कितना सफल होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन उनके इरादे स्पष्ट हैं।

झंझारपुर पुलिस का बड़ा खुलासा: ऑनर किलिंग निकला ओम प्रकाश हत्याकांड, चाची से अवैध संबंध और प्रेम प्रसंग बनी मौत की वजह

झंझारपुर (मधुबनी): झंझारपुर थाना क्षेत्र के चर्चित चनौरा गोठ निवासी ओम प्रकाश ठाकुर हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने महज एक सप्ताह के भीतर सुलझा लिया है। यह मामला न केवल सनसनीखेज निकला, बल्कि रिश्तों को शर्मसार करने वाली कहानी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, यह पूरी वारदात अवैध संबंध और प्रेम प्रसंग के कारण अंजाम दी गई, जिसे ‘ऑनर किलिंग‘ का रूप दिया गया।

सड़क दुर्घटना दिखाने की थी साजिश

बीते दिनों चनौरागंज फुट ओवर ब्रिज के पास एनएच 27 के किनारे से 20 वर्षीय ओम प्रकाश ठाकुर (पिता- शंकर ठाकुर) का शव बरामद हुआ था। हत्यारों ने युवक की गला रेतकर हत्या करने के बाद शव को घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर फेंक दिया था। उनकी योजना शव को किसी भारी वाहन से कुचलवाने की थी ताकि इसे एक साधारण सड़क दुर्घटना का रूप दिया जा सके। लेकिन रात 11 बजे ही पुलिस द्वारा शव बरामद कर लिए जाने के कारण उनकी यह साजिश नाकाम रही।

​कैसे खुला राज? (जांच के अहम पड़ाव)

झंझारपुर एसडीपीओ सुबोध कुमार सिन्हा ने बताया कि शुरुआत में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, लेकिन पुलिस की वैज्ञानिक जांच ने केस का रुख मोड़ दिया:

  • बगीचे में खून के धब्बे: डॉग स्क्वाड और एफएसएल (FSL) की टीम को जांच के दौरान मृतक के घर के पास एक बगीचे में खून के धब्बे मिले। इससे स्पष्ट हो गया कि हत्या घर के पास ही हुई थी।
  • तकनीकी टीम की मदद: वैज्ञानिक प्रयोगशाला, डॉग स्क्वाड और तकनीकी शाखा की रिपोर्ट के आधार पर संदिग्धों को घेरा गया।
  • मानवीय साक्ष्य: स्थानीय लोगों और परिजनों के बयानों में आए विरोधाभास ने पुलिस को हत्यारों तक पहुँचाया।

​सगे संबंधी ही निकले कातिल: 4 गिरफ्तार

पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल पांच आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी मृतक के करीबी रिश्तेदार और पड़ोसी ही हैं:

आरोपी का नाममृतक से सम्बन्ध
कैलाश ठाकुरसगा चाचा
जयशंकर ठाकुरचचेरा
अनमोल ठाकुरदूर का रिश्तेदार
मुरारी ठाकुरपड़ोसी (वार्ड सदस्य)

नोट: एक अन्य आरोपी राजा ठाकुर फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

हत्या की वजह: अवैध संबंध और ऑनर किलिंग

अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि मृतक ओम प्रकाश का अपनी ही सगी चाची के साथ अवैध संबंध था, जिसे लेकर कुछ समय पहले मोहल्ले में विवाद भी हुआ था। इसके अलावा, चचेरे चाचा जयशंकर ठाकुर के परिवार की एक लड़की के साथ भी उसका प्रेम प्रसंग चल रहा था।

परिवार की बदनामी और आपसी रंजिश के कारण इन रिश्तेदारों ने मिलकर हत्या की साजिश रची। पहले उसे बगीचे में ले जाकर धारदार चाकू से गला रेता गया और फिर साक्ष्य छुपाने के लिए शव को हाईवे किनारे फेंक दिया गया।

पुलिस की बरामदगी

डीएसपी सुबोध कुमार सिन्हा ने पुष्टि की है कि गिरफ्तार आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने घटनास्थल और आरोपियों के पास से निम्नलिखित चीजें बरामद की हैं:

  • घटना में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल
  • 4 मोबाइल फोन
  • ​अपराधी का खून लगा हुआ जूता

अपील: इस घटना ने एक बार फिर सामाजिक रिश्तों और अपराध के बढ़ते ग्राफ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन फरार अपराधी की तलाश में मुस्तैद है।

मधुबनी में सड़क निर्माण की नई क्रांति: FDR तकनीक से PMGSY-3 की सड़कों का कायाकल्प

बिहार के मधुबनी जिले में ग्रामीण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेज-3 के तहत जिले में पहली बार अत्याधुनिक FDR (Full Depth Restoration) तकनीक का उपयोग कर सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।

यह तकनीक न केवल सड़कों को अधिक टिकाऊ बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आइए जानते हैं क्या है यह तकनीक और मधुबनी के ग्रामीणों को इससे क्या लाभ मिलने वाला है।

​टी-28 बेलहा से खुटौना तक सड़क का

मधुबनी जिले के खुटौना प्रखंड में टी-28 बेलहा से ललमनियां होते हुए प्रखंड मुख्यालय तक जाने वाली 15.350 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस परियोजना की खास बातें निम्नलिखित हैं:

  • कुल लंबाई: 15.350 किमी।
  • प्रगति: लगभग 6.450 किमी हिस्से में पीसीसी और पुल-पुलिया का कार्य पूर्ण।
  • शेष कार्य: 8.900 किमी में डामरीकरण (Blacktopping) का कार्य अत्याधुनिक मशीनों से जारी।
  • ट्रायल प्रोजेक्ट: यह दरभंगा-कोसी प्रमंडल का पहला ट्रायल प्रोजेक्ट है, जिसे भविष्य के लिए मॉडल माना जा रहा है।

क्या है FDR (Full Depth Restoration) तकनीक?

साधारण भाषा में कहें तो FDR पुरानी सड़क को उखाड़कर फेंकने के बजाय उसे ‘रिसाइकिल’ करने की एक प्रक्रिया है।

  • पुरानी सामग्री का उपयोग: इसमें विशेष मशीनों द्वारा पुरानी सड़क की परतों को पीस दिया जाता है।
  • स्टेबलाइजेशन: पिसी हुई सामग्री में सीमेंट, चूना या अन्य स्टेबलाइजर मिलाए जाते हैं।
  • मजबूत आधार: इस मिश्रण को वापस बिछाकर भारी रोलरों से दबाया जाता है, जिससे एक बेहद मजबूत ‘बेस लेयर’ तैयार होती है।
  • अंतिम परत: इसके ऊपर डामर या कंक्रीट की अंतिम परत डाली जाती है।

FDR तकनीक के फायदे (Benefits of FDR Technology)

  • अत्यधिक टिकाऊ: यह तकनीक सड़क की नींव को इतना मजबूत बना देती है कि भारी वाहनों का दबाव सहना आसान हो जाता है।
  • लागत में कमी: पुरानी निर्माण सामग्री का पुन: उपयोग होने के कारण नई सामग्री (गिट्टी, मिट्टी) की जरूरत कम पड़ती है, जिससे लागत घटती है।
  • पर्यावरण के अनुकूल: नई खदानों से पत्थर निकालने की जरूरत कम होती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।
  • समय की बचत: पारंपरिक तरीकों की तुलना में इस तकनीक से सड़क निर्माण काफी तेजी से पूरा होता है।

स्थानीय विकास को मिलेगी नई रफ्तार

खुटौना और आसपास के ग्रामीणों के लिए यह सड़क किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। बेहतर कनेक्टिविटी से स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में सुधार होगा। निर्माण एजेंसी NKSP Infra Pvt. Ltd. के निर्देशक फिरोज यादव के अनुसार, इस तकनीक से बनी सड़कें लंबे समय तक चलेंगी और इन्हें बार-बार मरम्मत की आवश्यकता नहीं होगी।

मधुबनी में FDR तकनीक का यह सफल प्रयोग बिहार के अन्य जिलों के लिए एक मिसाल पेश करेगा। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में राज्य की सभी ग्रामीण सड़कों को इसी आधुनिक और किफायती तकनीक से बनाया जा सकता है।

बिहार में आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों के लिए न्याय का नया सवेरा: सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट के 2025 के बड़े फैसले

पटना | भूमि न्यूज़ लाइव: बिहार के लाखों संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यायपालिका ने ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट के 2025 के नवीनतम आदेशों ने अब सरकार और निजी एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगा दी है।

1. समान काम, समान वेतन (Equal Pay for Equal Work)

केस: स्टेट ऑफ पंजाब बनाम जगजीत सिंह (विस्तारित आदेश 2025) कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आउटसोर्स कर्मचारी नियमित स्टाफ जैसा ही काम कर रहे हैं, तो वे न्यूनतम वेतनमान (Basic + DA) के हकदार हैं। उन्हें केवल न्यूनतम मजदूरी देकर शोषण नहीं किया जा सकता।

2. स्थायी प्रकृति का काम (Perennial Nature of Work)

केस: सुप्रीम कोर्ट (अगस्त 2025 निर्देश) अदालत ने कहा कि जो काम ‘बारहमासी’ या स्थायी हैं (जैसे क्लर्क, ड्राइवर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सफाई कर्मी), उन्हें सालों-साल आउटसोर्सिंग पर नहीं रखा जा सकता। सरकार को इन पदों पर नियमित बहाली की दिशा में कदम उठाना होगा।

3. अनुभव को मान्यता और बोनस अंक

केस: पटना हाईकोर्ट (CWJC 1981/2025) बिहार के संदर्भ में यह सबसे बड़ा आदेश है। अब सरकारी बहाली में:

अनुभवी कर्मियों को उम्र सीमा (Age Relaxation) में विशेष छूट मिलेगी।

संविदा/आउटसोर्स कर्मियों को अनुभव का वेटेज (Bonus Marks) मिलेगा।

प्रति वर्ष अनुभव के लिए 5 अंक (अधिकतम 25 अंक) का लाभ दिया जाएगा।

4. नियमितीकरण (Regularisation) का नया आधार

केस: पटना हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट (2025 विश्लेषण) कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी थी और वह 10 वर्षों से अधिक सेवा दे चुका है, तो केवल ‘आउटसोर्स’ लेबल लगाकर उसे नियमितीकरण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

  • वेतन: पद के न्यूनतम पे-स्केल की गारंटी।
  • अनुभव: नियमित बहाली में प्राथमिकता और बोनस अंक।
  • सुरक्षा: बिना ठोस कारण और नोटिस के काम से हटाने पर रोक।

बिहार में आउटसोर्सिंग व्यवस्था अक्सर भ्रष्टाचार और शोषण का अड्डा बनी रही है। लेकिन न्यायपालिका के इन कड़े फैसलों ने बेलट्रॉन (BELTRON) से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विभागो में कार्यरत लाखों युवाओं को एक नई ताकत दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार सरकार इन फैसलों को जमीन पर कितनी तेजी से उतारती है।- कार्तिक कुमार

बिहार की राजनीति: जदयू प्रवक्ता मनीष यादव का तेजस्वी पर तीखा प्रहार, ‘नैतिकता’ पर उठाए सवाल

बिहार की राजनीति में जुबानी जंग कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल ही में जदयू (JDU) प्रवक्ता मनीष यादव ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर जो हमला बोला है, उसने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है। मनीष यादव ने तेजस्वी यादव की सदन में अनुपस्थिति को मुद्दा बनाते हुए उनके पद की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

क्या है पूरा मामला ?

जदयू प्रवक्ता मनीष यादव ने एक बयान जारी करते हुए तेजस्वी यादव की कार्यशैली पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब तेजस्वी यादव सदन की कार्यवाही में हिस्सा ही नहीं लेते और सदन में मौजूद नहीं रहते, तो उन्हें ‘नेता प्रतिपक्ष’ की जिम्मेदारी और सुख-सुविधाओं का मोह क्यों है?

मनीष यादव के तीखे सवाल

मनीष यादव ने अपने बयान में मुख्य रूप से तीन बातें रेखांकित कीं:

  • जिम्मेदारी से भागने का आरोप: उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक जिम्मेदारी का होता है। अगर आप सदन में जनता की आवाज उठाने के लिए उपस्थित नहीं हो सकते, तो आपको पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।
  • पद छोड़ने की चुनौती: जदयू प्रवक्ता ने सीधे शब्दों में कहा, “जब आप सदन की कार्यवाही में नहीं आते, तो नैतिकता के आधार पर नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी क्यों नहीं छोड़ देते?”
  • जनता के साथ विश्वासघात: उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव केवल ट्विटर और सोशल मीडिया की राजनीति करते हैं, जबकि असल मुद्दों पर सदन में चर्चा के समय वे नदारद रहते हैं।

विपक्ष का घेराव और राजनीतिक मायने

यह पहली बार नहीं है जब जदयू ने तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाया है। एनडीए के नेताओं का अक्सर यह तर्क रहता है कि तेजस्वी महत्वपूर्ण विधायी सत्रों के दौरान बिहार से बाहर रहते हैं।

मनीष यादव के इस हमले के पीछे की रणनीति स्पष्ट है: जनता के बीच तेजस्वी यादव को एक ‘पार्ट-टाइम’ राजनेता के रूप में पेश करना।

बिहार विधानसभा चुनाव की आहट जैसे-जैसे करीब आएगी, इस तरह के हमले और तेज होंगे। अब देखना यह है कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) मनीष यादव के इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या तेजस्वी यादव अपनी सदन में उपस्थिति को लेकर कोई नई रणनीति अपनाते हैं।

झंझारपुर: एसडीपीओ सुबोध कुमार सिंह ने की मासिक अपराध समीक्षा बैठक, अपराधियों पर नकेल कसने के सख्त निर्देश

झंझारपुर। स्थानीय अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) कार्यालय में शुक्रवार को मासिक अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुबोध कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में क्षेत्र की कानून व्यवस्था, लंबित कांडों के निष्पादन और आगामी सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में अनुमंडल के सभी थाना प्रभारी और अंचल निरीक्षक मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

बैठक के मुख्य बिंदु:

एसडीपीओ सुबोध कुमार सिंह ने अपराध नियंत्रण को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए:

  • अपराध नियंत्रण और गश्ती: क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए रात्रि गश्ती को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस की उपस्थिति सड़कों पर दिखनी चाहिए ताकि आमजन सुरक्षित महसूस करें।
  • एंटी क्राइम व्हीकल चेकिंग: संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सभी थाना क्षेत्रों में सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाने का निर्देश दिया गया। विशेष रूप से बिना नंबर प्लेट और तेज रफ्तार बाइक चलाने वालों पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है।
  • केस डिस्पोजल (कांडों का निष्पादन): थानों में लंबित पड़े पुराने मामलों को जल्द से जल्द निपटाने और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आदेश दिया गया।
  • सक्रिय अपराधियों पर निगरानी: जेल से छूटे और क्षेत्र के सक्रिय अपराधियों की गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया गया। अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए खुफिया तंत्र को मजबूत करने पर बल दिया गया।
  • त्वरित गिरफ्तारी: वारंटी और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आ सके।

​”जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस मुस्तैदी से काम कर रही है। लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाएगी।”— सुबोध कुमार सिंह, एसडीपीओ, झंझारपुर

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट

बैठक के समापन पर एसडीपीओ ने सभी थाना प्रभारियों को जनता के साथ बेहतर समन्वय बनाने और सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस तकनीकी और मानवीय दोनों स्तरों पर काम कर रही है।

नरहिया गोलीबारी कांड: मुख्य आरोपी अंशु राय गिरफ्तार, पुलिस ने देशी पिस्टल भी की बरामद

फुलपरास (मधुबनी): अनुमंडल अंतर्गत नरहिया थाना क्षेत्र में सरस्वती पूजा विसर्जन के दौरान हुई सनसनीखेज गोलीबारी मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी अंशु राय को गिरफ्तार कर लिया है।

गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई

अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अमित कुमार ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि पुलिस को आरोपी के ठिकाने के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। इसी आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए भपटियाहीं गांव में छापेमारी की गई, जहाँ से अंशु राय को दबोच लिया गया।

अवैध हथियार बरामद

गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो आरोपी की निशानदेही पर उसके घर के पीछे छिपाकर रखी गई एक अवैध देशी पिस्टल बरामद की गई। पुलिस इस हथियार की जांच कर रही है कि क्या इसी से विसर्जन के दौरान फायरिंग की गई थी।

​क्या था पूरा मामला?

​​बीती 24 जनवरी को सरस्वती पूजा प्रतिमा विसर्जन के लिए जुलूस निकाला गया था। आरोप है कि जुलूस के दौरान नशे में धुत एक युवक ने अचानक फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में प्रहलाद कुमार नामक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था।

घटना के बाद से ही क्षेत्र में तनाव का माहौल था और पुलिस लगातार आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी कर रही थी।

पुलिस अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। गिरफ्तार अभियुक्त से पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य संपर्कों का पता लगाया जा सके। आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।- SDPO, फूलपरास

इस गिरफ्तारी से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। पुलिस अब इस मामले में अन्य शामिल तत्वों और अवैध शराब व हथियार के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

फुलपरास: 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में वामपंथी नेताओं ने NH जाम कर किया प्रदर्शन

मधुबनी (बिहार): केंद्र सरकार की ‘मजदूर और किसान विरोधी’ नीतियों के खिलाफ आज, 12 फरवरी 2026 को ट्रेड यूनियनों और वामपंथी दलों द्वारा बुलाए गए देशव्यापी हड़ताल का असर बिहार के मधुबनी जिले में भी देखने को मिला। इसी क्रम में फुलपरास के लोहिया चौक पर सीपीआई (एम) (CPI-M) और विभिन्न वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) को जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रमुख मांगें जिन पर रहा जोर:

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में लाल झंडे और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनके मुख्य एजेंडे में निम्नलिखित मांगें शामिल थीं:

  • चार लेबर कोड वापस लो: कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम कानूनों (Labour Codes) को वापस लेने की मांग की, जिसे वे मजदूर विरोधी बता रहे हैं।
  • किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी: कृषि उत्पादों के लिए कानूनी रूप से MSP की मांग दोहराई गई।
  • मनरेगा कानून में बदलाव वापस लो: मनरेगा के बजट में कटौती और इसके स्वरूप में बदलाव का विरोध करते हुए इसे पुराने स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई।
  • निजीकरण पर रोक: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण को रोकने की आवाज बुलंद की गई।

नेताओं का बयान

मौके पर मौजूद अंचल कमेटी, फुलपरास के नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि जब तक सरकार इन ‘काले कानूनों’ को वापस नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन और भी उग्र होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विकसित भारत के नाम पर मजदूरों को बंधुआ बनाने की साजिश रची जा रही है।

लौकहा के विकास के लिए विधायक सतीश कुमार साह की बड़ी पहल: विधानसभा में उठाए सड़क निर्माण के महत्वपूर्ण प्रश्न

लौकहा, बिहार। लौकहा विधानसभा क्षेत्र के समग्र विकास और ग्रामीण कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में विधायक सतीश कुमार साह निरंतर सक्रिय हैं। इसी क्रम में, उन्होंने बिहार विधानसभा के 18वें सत्र के दौरान क्षेत्र की जर्जर सड़कों और नई कनेक्टिविटी को लेकर महत्वपूर्ण ‘तारांकित प्रश्न’ (Starred Questions) उठाए हैं।

विधायक की इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों और बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वास्थ्य केंद्रों और रेलवे स्टेशनों से जोड़ना है।

विधानसभा में उठाए गए मुख्य मुद्दे

सतीश कुमार साह ने सदन के माध्यम से ग्रामीण कार्य विभाग का ध्यान निम्नलिखित प्रमुख सड़कों की ओर आकर्षित किया है:

  • माधोपुर से एन.एच-104 तक सड़क निर्माण: खुटौना प्रखंड के अंतर्गत माधोपुर गांव से भुतही बलान के पश्चिमी तटबंध होते हुए NH-104 तक (लगभग 4 किमी) सड़क का निर्माण न होने से स्थानीय जनता को स्वास्थ्य उपकेंद्र और लौकहा रेलवे स्टेशन जाने में भारी कठिनाई हो रही है।
  • सड़कों का सुदृढ़ीकरण एवं मरम्मत: विधायक जी ने उन सड़कों के जीर्णोद्धार की मांग भी की है जो वर्षों पहले बनी थीं और अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। इसमें खुटौना प्रखंड के बघमरिया से बसनिया प्राथमिक विद्यालय तक और NH-104 से बरकोर गांव तक की सड़कें शामिल हैं।

प्रशासनिक सक्रियता और सराहनीय भूमिका

क्षेत्र के विकास कार्यों को धरातल पर उतारने में कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग (फुलपरास) की भूमिका भी अत्यंत सराहनीय रही है। विभाग और विधायक के बीच का यह बेहतर समन्वय ही लौकहा की बदलती तस्वीर का आधार बन रहा है।

​”मेरा लक्ष्य लौकहा के हर गांव को मुख्य सड़क से जोड़ना है ताकि किसानों, छात्रों और मरीजों को आवागमन में कोई असुविधा न हो। विकास की यह प्रक्रिया रुकने वाली नहीं है।” – सतीश कुमार साह, विधायक (लौकहा)

विकास की ओर बढ़ता लौकहा

विधायक के इन प्रयासों से यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में लौकहा विधानसभा क्षेत्र में यातायात की स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। स्थानीय निवासियों ने विधायक जी की इस संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।